ओखाण सोनै री खाण

                                                      ओखाण सोनै री खाण केवणिया आंपाणां बडेरा जाणता हा के लोकज्ञान नैं ओछा सूं ओछा शब्दां में प्रभावी रीत सूं पुरसण री कला रौ नाम है कहावत।बंतल करता वखत हर कोई रै मूंडै सूं ओखाणां आपोआप निकल जावै।इण खातर इज ओखाण मायङ भाषा रौ सै सूं रूपालौ और मनमोवनियौ रूपक मानीजै।पण कई कारणां सूं ओखाणां रौ ओ भंडार दिन-दिन ओछौ हुवतौ जाय रह्यौ है।वखत आयगौ है के कहावतां नैं कम्प्यूटरीकृत कर बडेरां रै इण अमोलक खजानौ रौ वारसौ आगली पीढी नैं सूंप दियौ जावै।

                                                   संसार री दरेक संस्कृति,दरेक भाषा में आम आदमी री वैवारिक बुद्धि ओखाण बण ’र चावी हुई तो विद्वानां रा वाणी साहित्य कहीजी।मरुधरा अर उणरी संस्कृति इणरौ अपवाद कोनीं।धोरा-धरती री कहावतां अठै रा सतरंगी जनजीवन रौ सांगोपांग चित्रण करै।उणां में अठै री माटी री मीठी सौरम है.फोग,खेजङी,केर,काचर-मतीरा,धोरां,बाजरी,छाछ,लू,काळ,मेह,ऊँट-बकरी सूं जुङियौङी कहावतां अठै री मिनखां री कोठासूझ लोकबुद्धि रौ प्रमाण है।साथै साथै ओखाण मानवी संबंधां अर मानवी भावनावां रौ साचौ दर्पण पण है।राजस्थानी रा नीति-कहावतां नीतिशतक रा श्लोकां अर रहीम रा दूहां सरखामणी री है।इण खातर ईज तो कहीजै के काळ खपै(नाश पामै)ओखाण अजै(अमर रैवै)।ओखाणां रै ‘शिवत्व’ के उणां री ‘सत्यता’ रै बाबत कोई शंका नीं हुय सकै।हाँ आ बात जरूर है के कई मिनखां नैं थोङी-घणी कहावतां में‘सुन्दरम्’नीं दिखै क्यूं के लोकबुद्धि घणी वार ‘कुआङिया फाङ साँच’ केय देवै अर उण में काम आयौङा शब्द उत्ता परिष्कृत नीं हुय सकै जित्ती आशा साहित्य सूं करीजै।पण इण बाबत आ बात ध्यान राखण जोग है के ओखाण लोकवैवार रौ अभिव्यक्ति है अर इणां रौ कापीराईट आम आदमी कनै है।

                                                     राजस्थानी रा लूंठा साहित्यकार डा.नृसिंह राजपुरोहित(1924-2005)आज सूं लगैटगै साठे’क बरस पेली कहावतां भेली करण रौ कांम आदरियौ हो।उणां आपरा शिष्यां रै माध्यम सूं चोखलै रै कई गावां सूं कहावतां रौ संग्रह करवायौ हो।उणी’ज परंपरा नैं धकै बधावण खातर उणां री याद में थरपित डा.नृसिंह राजपुरोहित स्मृति कोष ओखाण संग्रह रौ महताऊ काम हाथ में लियौ है।पण ओ यज्ञ मायङभाषा रा चावणिया अर जाणकारां री समिधावां वगर पूरौ नीं हुय सकै।कोष मायङभाषा रा सपूतां नैं अरदास करै के आप ओखाण-संग्रह रा भगीरथी काम में सहयोग करावौ।आपरै हाथां जठै सूं ओखाणां जङ जावै उणानैं ईण वेबसाईट ऊपर के  drnrskosh@gmail.com  रै ई-मेल पतै ऊपर भेजण री मेहरबानी करावौ।

                                                       डा.राजपुरोहित रा शिष्य(घणखरा शिक्षक),सहकर्मी अर कुटुंबी लारला कई बरसां सूं कोष चलाय रह्या है।आ संस्था साहित्यिक,शैक्षणिक अर खेलकूद गतिविधियां सूं जुङियौङौ है।वरस 2014 में कोष पेली अखिल भारतीय राजस्थानी कहाणी प्रतियोगिता रौ आयोजन करवायौ हो।2015 री राजस्थानी कहाणी प्रतियोगिता री घोषणा बेगी’ज की जावैला।

 


आप ओखाण री विगत बणाय ने सीधी ईमेल कर सको हो सबसू ज़्यादा कहावतो भेजण वालो रो सन्मान करिजेला

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